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रेल यात्रियों के लिए अच्छी खबर, सफर के दौरान रुचि और जरूरत के हिसाब से मिलेगा भोजन

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आईआरसीटीसी : रेल यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। ट्रेन में सफर के दौरान यात्रियों को रुचि और जरूरत के हिसाब से भोजन मिलेगा। रेलवे ने आईआरसीटीसी को इसके अनुसार भोजन के मेन्यु में बदलाव के अधिकार दे दिए



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Ashneer Grover exposes bharatPe co founder shashvat nakrani after firm sues him for fraud detail here – Business News India

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फिनटेक यूनिकॉर्न BharatPe के पूर्व एमडी अश्नीर ग्रोवर ने कंपनी के को-फाउंडर शाश्वत नाकरानी को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर एक अहम खुलासा किया है। इस खुलासे को अश्नीर ग्रोवर ने शाश्वत नाकरानी का ‘दोगलापन’ करार दिया है। 

क्या है मामला: दरअसल, BharatPe ने अपने अपदस्थ को-फाउंडर अश्नीर ग्रोवर के अलावा उनकी पत्नी माधुरी जैन ग्रोवर के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दिल्ली हाईकोर्ट में दायर मुकदमे में ग्रोवर दंपत्ति और उनके तीन रिश्तेदारों पर गबन के आरोप लगाए गए हैं।

यही नहीं, BharatPe ने आर्थिक अपराध शाखा के पास आपराधिक शिकायत भी दर्ज कराई है। कंपनी ने उनसे हर्जाने के तौर पर 88.67 करोड़ रुपये की मांग की है। अब इसी मामले को लेकर अश्नीर ग्रोवर ने BharatPe के को-फाउंडर शाश्वत नाकरानी पर निशाना साधा है। 

क्या कहा अश्नीर ने: ट्विटर पर तस्वीर शेयर करते हुए अश्नीर ग्रोवर ने ‘दोगलापन’ लिखकर एक घटना का जिक्र किया है। अश्नीर लिखते हैं, ” शाश्वत (को-फाउंडर) ने मुझसे कहा- भाई डिग्री पूरी करनी है। एक साल ऑफिस बंक करके IIT पूरा कर लेता हूं। सेकेंडरी करा देना और सैलरी भी मत रोकना, इन्वेस्टर को मत बताना।” 

अश्नीर के ट्वीट के मुताबिक शाश्वत ने बोर्ड से कहा: अश्नीर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने पर मुझे कोई आपत्ति नहीं है। 

अश्नीर की नई मुसीबत: इस बीच, न्यूज एजेंसी पीटीआई के सूत्रों ने बताया है कि अशनीर ग्रोवर के पास मौजूद हिस्सेदारी और संस्थापक के दर्जे को वापस लेने के लिए मध्यस्थता अर्जी लगाई है। सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (सीआईएसी) के नियमों के तहत यह मध्यस्थता अर्जी दायर की गई है। BharatPe की यह अर्जी स्वीकार कर ली जाती है तो ग्रोवर अपने पास मौजूद कंपनी के रोके गए शेयर और संस्थापक का दर्जा गंवा सकते हैं।

कितनी है हिस्सेदारी: BharatPe में करीब 8.5 प्रतिशत हिस्सेदारी ग्रोवर के पास है लेकिन इसमें से 1.4 प्रतिशत शेयरधारिता प्रतिबंधित श्रेणी में हैं। प्रतिबंधित शेयरधारिता का मतलब है कि कंपनी के कर्मचारी के तौर पर मिली उस हिस्सेदारी को हस्तांतरित नहीं जा सकता है।

बता दें कि BharatPe ने साल की शुरुआत में ग्रोवर पर कोष की धांधली, धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे। उसके बाद ग्रोवर और उनकी पत्नी माधुरी जैन कंपनी से अलग हो गए थे। लेकिन दोनों पक्षों के बीच लगातार आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा।    



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Concor privatisation Bidding for Concor privatisation likely to begin in January 2023 – Business News India

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Concor privatisation: केंद्र सरकार कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (कॉनकॉर) के निजीकरण के लिए अगले वर्ष जनवरी में शुरुआती बोलियां आमंत्रित कर सकती है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि इसके अलावा कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय से भारतीय नौवहन निगम (SCI) की गैर-प्रमुख एवं भूमि परिसंपत्तियों को अलग करने की मंजूरी भी इस महीने मिलने की उम्मीद है जिसके बाद सरकार मार्च या अप्रैल में एससीआई के लिए वित्तीय बोलियां आमंत्रित कर सकती है।

65,000 करोड़ रुपये का विनिवेश टारगेट

मार्च में खत्म होने जा रहे चालू वित्त वर्ष में अब और कोई रणनीतिक हिस्सेदारी की बिक्री की उम्मीद नहीं है, ऐसे में 65,000 करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य को पाने के लिए सरकार छोटी हिस्सेदारी की बिक्री पर जोर दे सकती है। अधिकारी ने कहा, ”हम लक्ष्य का पीछा नहीं कर रहे। जहां भी मूल्य मिलता दिखेगा, वहां हम विनिवेश कर देंगे।” उन्होंने बताया कि बीईएमएल, एचएलएल लाइफकेयर और एससीआई की रणनीतिक बिक्री के समापन की प्रक्रिया अगले वित्त वर्ष तक जारी रह सकती है।

₹300 का यह दिग्गज शेयर टूटकर ₹2 का हुआ, 1 लाख का निवेश घटकर ₹700 रह गया, 99% का नुकसान

रुचि पत्र जनवरी तक लाने का प्रयास

सरकार एससीआई में 63.75 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री कर रही है जिसमें मैनेजमेंट का ट्रांसफर भी शामिल है। एससीआई के बहीखातों के मुताबिक जिन गैर प्रमुख परिसंपत्तियों को अलग करने के लिए रखा गया है उनका मूल्य 31 मार्च, 2022 तक 2,392 करोड़ रुपये था।

कॉनकॉर की रण्नीतिक बिक्री अगले वित्त वर्ष में पूरी होने का अनुमान है क्योंकि इस प्रक्रिया के पूरा होने में लगभग दस महीने का वक्त लगता है। अधिकारी ने बताया कि कॉनकॉर के लिए रुचि पत्र जनवरी तक लाने का प्रयास किया जाएगा।

     



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Anil Ambani led Reliance Communications share huge down 99 percent 1 lakh decrease 700 rupees – Business News India

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Stock Crash: आज हम आपको एक ऐसे शेयर के बारे में बता रहे हैं जिसने अपने भरोसेमंद निवेशकों को 99 पर्सेंट का नुकसान (Stock return) कराया है। कभी शेयर बाजार में इस शेयर का बोलबाला था और इसने अपने निवेशकों को मालामाल भी किया था। लेकिन एक समय ऐसा आया जब कंपनी के बुरे दिन शुरू हो गए और इसका असर शेयरों पर पड़ने लगा। आज इस शेयर की कीमत मात्र 2.10 रुपये रह गई है। कभी यह शेयर ऑल टाइम हाई लगाते हुए 820.80 रुपये (10 जनवरी 2008) पर भी पहुंच गया था। हम बात कर रहे हैं अनिल अंबानी की कर्ज में डूबी कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस यानी आरकाॅम (Reliance Communications Ltd) की। कंपनी के शेयरों ने लंबी अवधि में 99.30 पर्सेंट का नुकसान कराया है। 

₹300 का शेयर 2.10 रुपये का हुआ

Reliance Communications Ltd के शेयर प्राइस हिस्ट्री के मुताबिक, यह शेयर पिछले कई सालों से लगातार नुकसान करा रहा है। पिछले 16 सालों में यह शेयर 300.55 रुपये (10 मार्च 2006 का बंद प्राइस) से टूटकर 2.10 रुपये (5 दिसंबर 2022) पर आ गया है। यानी इस दौरान 1 लाख का निवेश घटकर मात्र 700 रुपये के आसपास रह गया। बता दें कि जिन निवेशकों ने इस कंपनी पर भरोसा जताया था और निवेश को बनाए रखा है वे अब तक कंगाल हो चुके। 

पैसा रखिए तैयार…अगले सप्ताह लॉन्च हो रहे 3 धांसू IPO, दांव लगाने वाले पहले ही दिन हो जाएंगे मालामाल!

कर्ज में डूब गई कंपनी

अनिल धीरूभाई अंबानी समूह की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) की दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही है। यह टेलीकॉम सेक्टर की दिग्गज कंपनियों की लिस्ट में शामिल थी लेकिन टेलीकॉम सेक्टर में तगड़ा टैरिफ वार शुरू होने के बाद आरकॉम को भारी घाटा होने लगा। यह प्रतिस्पर्धा खुद उनके बड़े भाई मुकेश अंबनी ने जियो के जरिए शुरू की थी। जियो के फ्री काॅल्स और सस्ता डेटा ने RCom को लगभग बर्बाद कर दिया और कंपनी भारी कर्ज में डूब गई और फिर कभी उबर नहीं पाई। 



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