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हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव में इस बार भाजपा-कांग्रेस दोनों अपने दिग्गज नेताओं की कमी महसूस कर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस नेता वीरभद्र सिंह के निधन और भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के चुनाव मैदान में न होने से नए नेतृत्व की परीक्षा हो रही है। साथ ही दोनों तरफ के वादों-दावों से जनता पूरी तरह सहमत नहीं है। उसका कहना है काम कम, बातें ज्यादा हो रही हैं। 

हिमाचल का चुनाव नए दौर की राजनीति की कसौटी पर कसा है। भाजपा का चेहरा मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर हैं तो कांग्रेस अपने प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह के नेतृत्व में मैदान में है। भाजपा ने गत चुनाव में धूमल को सीएम पद का चेहरा बनाया था, पर वह चुनाव हार गए थे। बाद में जयराम ठाकुर सीएम बने। दूसरी तरफ, वीरभद्र के निधन के बाद कांग्रेस ने उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह को कमान सौंपी है।

गुजरात में कांग्रेस के सामने अपना ‘आदिवासी गढ़’ बचाने की चुनौती, भाजपा के इन दो नेताओं ने बढ़ाई टेंशन

मतदाता दो दशकों से वीरभद्र-धूमल के बीच चुनाव करता रहा है। इस बार उनके सामने न सिर्फ चेहरे नए हैं बल्कि, वादे भी बड़े-बड़े और नए-नए हैं। महंगाई मुद्दा तो है पर उसकी ज्यादा चर्चा नहीं है। सोलन के विशाल वशिष्ठ का कहना है कि कोरोना के बाद कारोबार पर काफी असर पड़ा है, पर इस तरह ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया। दोनों दलों से राजपूत समुदाय का नेतृत्व प्रभावी होने से अन्य समुदाय ज्यादा खुश नहीं है। इनका मानना है कि सभी वर्गों को मौका देना चाहिए।

केंद्रीय नेतृत्व की सक्रियता शिमला में दोनों दलों के प्रदेश के कार्यकर्ता आते-जाते रहते हैं। उनका मानना है राज्य स्तर पर नेतृत्व संकट है। कांग्रेस के बड़े प्रचारक राहुल और सोनिया गांधी ने अभी तक प्रचार नहीं किया है। बड़े नेताओं में शामिल आनंद शर्मा भी सक्रिय नहीं है। दूसरी भाजपा में भी मतभेद और मनभेद है, लेकिन चुनावी मैदान पर सभी नेता सक्रिय हैं।

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heart attack prevention tips how to know you have clots in blood arteries

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मेडिकल रिकॉर्ड्स कहते हैं, भारत में अचानक होने वाली मौतों की सबसे बड़ी दिल की बीमारी है। डॉक्टर्स कहते हैं कि जिन लोगों को हार्ट अटैक होता है, उनके ब्लड में पहले से क्लॉट होते हैं। उन्हें पता नहीं चल पाता। जब कभी एक्सरसाइज या ओवरएक्साइटमेंट में एग्जर्शन होता है तो ये क्लॉट टूटकर ब्लड में आगे बढ़ते हैं। अगर ये आगे चलकर ब्रेन, लंग या हार्ट की ब्लड सप्लाई रोक देते हैं तो हार्ट अटैक हो जाता है। ब्लड क्लॉट होना सामान्य प्रक्रिया है। खून के थक्के इसलिए जमते हैं कि कभी आपको चोट लगे या ऐक्सीडेंट वगैरह हो तो ज्यादा खून बह जाने से मौत न हो जाए। ये खून को जमाकर बहने से रोकते हैं। हालांकि ये क्लॉट्स अगर खुद नहीं घुलते तो आपके लिए खतरा बन सकते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कोरोना के बाद लोगों में यह समस्या देखने को मिल रही है। इस वजह से भी हार्ट अटैक की घटनाएं बढ़ रही हैं। यहां कुछ लक्षण हैं जिनसे आप पहचान सकते हैं कि कहीं आपकी धमनियों में खून का थक्का तो नहीं जम रहा।

बढ़े हैं ब्लड क्लॉटिंग के मामले

कुछ स्टडीज में सामने आया है कि कोरोना के बाद लोगों में ब्लड क्लॉट्स के मामले बढ़े हैं। इस वजह से हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक्स जैसे केसेज सामने आ रहे हैं। जब आर्टरीज यानी धमनी में थक्का जमता है तो इसे आर्ट्रियल थ्रॉम्बोसिस कहते हैं। यह काफी खतरनाक होता है। वेलनेस एक्सपर्ट करिश्मा शाह ने अपने इंस्टाग्राम पर कुछ लक्षण बताए हैं जिनसे आप क्लॉटिंग के लिए सतर्क हो सकते हैं। 

सूजन

जब क्लॉट रक्त संचार को रोकता या धीमा करता है तो यह वेसेल्स में जमा होता है, जिससे सूजन हो सकती है। आपके पेट या बांह में भी क्लॉट हो सकता है। क्लॉट हट भी जाता है तो भी कई लोगों को सूजन या दर्द की समस्या रहती है। यह ब्लड वेसेल्स के डैमेज की वजह से होता है। 

त्वचा का रंग

अगर क्लॉट आपके पैर या बांह में है तो नीला या लाल रंग दिखाई देगा। ब्लड वेसेल्स के डैमेज से आपकी स्किन का रंग बदला दिखेगा। 

दर्द

अचानक से सीने में दर्द होने का मतलब यह भी हो सकता है कि क्लॉट टूटा है। या फिर कई बार यह साइलेंट हार्ट अटैक का  लक्षण भी हो सकता है। अगर दर्द आपकी बांई भुजा में है तो आपको डॉक्टर से जरूर मिल लेना चाहिए। ये भी पढ़ें: हार्ट अटैक से मौतों के बीच हर डॉक्टर ने दी एक ही सलाह, आप भी करें फॉलो

सांस लेने में परेशानी

सांस लेने में दिक्कत होना सीरियस दिक्कत है। यह आपके लंग या हार्ट में क्लॉट का साइन हो सकता है। आपके दिल की धड़कन तेज हो सकती है या आपको पसीने के साथ बेहोशी आ सकती है। 

ब्लड क्लॉट की वजहें

प्रेग्नेंसी

देर तक बैठना या बेड रेस्

स्मोकिंग

मोटापा

हार्ट एरिदिमिया

डीप वेन थ्रॉम्बॉसिस

कोविड 

परिवार में ब्लड क्लॉट की हिस्ट्री

ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स या हॉरमोन थेरपी ड्रग्स

नोट: इन सारे लक्षणों की वजह कोई और समस्या भी हो सकती है। आपको जरा भी शक हो तो सबसे पहले अपने डॉक्टर से मिलें।

 

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Himachal Pradesh elections results 2022 arvind kejriwal AAP one percent vote share

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Himachal Pradesh Elections Results 2022: हिमाचल प्रदेश के चुनाव 68 सीटों के रुझान में आम आदमी पार्टी का खाता तक नहीं खुल पाया है। प्रदेश में सामने आए रुझानों की मानें तो पहाड़ी राज्य में आम आदमी पार्टी फिसलती हुई नजर आ रही है। हिमाचल में पहाड़ों पर चढ़ाई के मकसद से चुनावी मैदान में उतरी अरविंद केजरीवाल की पार्टी आप एक कदम भी नहीं चलती दिख रही है। चुनाव आयोग के आंकड़ों में आम आदमी पार्टी का स्कोर जीरो है।

इतना ही नहीं, चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक पार्टी को 1 फीसदी ही वोट मिले हैं। ऐसे में दिल्ली नगर निगम चुनावों में अपना जादू दिखाने वाले अरविंद केजरीवाल की पार्टी प्रदेश में पार्टी बुरी तरह से मात खाती दिख रही है। 

फिलहाल के रूझानों में कांग्रेस 38 और भाजपा 27 चल रही है। तीन सीटों पर निर्दलीय समेत अन्य आगे चल रहे हैं। ऐसे में रूझानों पर गौर करें तो राज्य में भाजपा का रिवाज बदलने का नहीं बल्कि कांग्रेस का राज बदलने का नारा साकार होता दिखाई दे रहा है। सभी सीटों पर चुनाव लड़ने वाली आम आदमी पार्टी(आप) को मतदाताओं ने पूर्णतया नकार दिया है।      

    

हिमाचल प्रदेश की कुल 68 सदस्यीय विधानसभा के लिए 12 नवंबर को चुनाव हुए, जिसमें 412 उम्मीदवार चुनावी अखाड़े में उतरे। चुनावी दंगल में भाजपा और कांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी (आप), मार्क्सवादी कम्युनस्टि पार्टी (माकपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और अनेक निर्दलीय उतरे थे। इनमें 388 पुरुष और 24 महिला उम्मीदवार हैं।

    

इस बार के विधानसभा चुनाव में 76.6 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान केंद्रों पर अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर इतिहास रच दिया था। नर्विाचन आयोग ने हालांकि राज्य में इस बार 80 प्रतिशत मतदान का लक्ष्य रखा था। इससे पहले वर्ष 2017 में 75.57 प्रतिशत, 2007 में 71.61 प्रतिशत और 2012 में 72.69 प्रतिशत मतदान हुआ था। वर्ष 2017 के चुनावों में भाजपा को 44, कांग्रेस को 21 सीटें मिलीं थीं। दो सीटों पर नर्दिलीय और एक सीट पर माकपा प्रत्याशी ने जीत हासिल की थी।

 

 

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किसने दौड़ा दी 'मोदी के घर' में सपा की साइकिल, अखिलेश के लिए गुजरात से भी खुशखबरी

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उत्तर प्रदेश में दो विधानसभा और एक लोकसभा सीट पर शानदार प्रदर्शन करने वाली समाजवादी पार्टी को गुजरात से भी खुशखबरी मिली है। पहली बार पीएम मोदी के गृहराज्य में सपा का खाता खुलने की संभावना दिख रही है।

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