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IRCTC Q2 results Net profit up 42 percent to 226 cr rs revenue soars nearly 100 percent stock price – Business News India

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इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन यानी IRCTC ने सितंबर तिमाही के नतीजे जारी कर दिए है। इस तिमाही में IRCTC का नेट प्रॉफिट 42.5% तक बढ़कर ₹226 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को ₹158.5 करोड़ का मुनाफा हुआ था। 

सितंबर तिमाही में परिचालन से कंपनी का राजस्व 99% बढ़कर ₹805.8 करोड़ हो गया, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में राजस्व ₹404.9 करोड़ था। तिमाही के दौरान IRCTC का कुल खर्च बढ़कर ₹524 करोड़ हो गया, जबकि एक साल पहले की अवधि में यह ₹207.4 करोड़ था।

IRCTC की बिक्री में भी इजाफा हुआ है और यह 368% बढ़कर ₹334 करोड़ हो गया है। इंटरनेट टिकटिंग से बिक्री सालाना आधार पर 13% बढ़कर ₹300 करोड़ हो गया। एक साल पहले इसी तिमाही में ₹265 करोड़ की बिक्री हुई थी।

ये पढ़ें- ऑल टाइम हाई पर अंबुजा सीमेंट्स का शेयर भाव, अडानी ने खरीदी है कंपनी

शेयर की बढ़ी खरीदारी: सप्ताह के पहले कारोबारी दिन यानी सोमवार को IRCTC के शेयर का भाव 758.90 रुपये था। यह एक दिन पहले के मुकाबले 1.46% की तेजी को दिखाता है। वहीं, मार्केट कैपिटल 60 हजार करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है।



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Zim Laboratories declared 21 ratio bonus share fixed record date share surges 186 percent from 52 week low – Business News India

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Bonus Share: एक और स्मॉल-कैप (Small cap stock) कंपनी अपने निवेशकों को तगड़ा मुनाफा कराने की तैयारी में है। यह फॉर्मा कंपनी ज़िम लैबोरेट्रीज लिमिटेड (Zim Laboratories Ltd) है। कंपनी अपने इलिजिबल शेयरहोल्डर्स को 2:1 के रेशियो के हिसाब से बोनस शेयर देने का ऐलान किया। यानी कंपनी के एक शेयर पर दो बोनस शेयर दिए जाएंगे। Zim Laboratories Ltd) के शेयर शुक्रवार को 320 रुपये पर बंद हुए। 

कंपनी ने क्या कहा?

कंपनी के निदेशक मंडल ने आज शुक्रवार को स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि  कंपनी  इलिजिबल निवेशकों को 2:1 के रेशियो में बोनस शेयर जारी करेगी। यानी प्रत्येक एक शेयर पर कंपनी के दो बोनस शेयर दिए जाएंगे। इसके लिए रिकॉर्ड डेट 22 दिसंबर 2022 तय किया गया है। इसका फेस वैल्यू 10 रुपये प्रति शेयर है।

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कंपनी के शेयरों का हाल

Zim Laboratories Ltd के शेयर पिछले 1 साल में 4.76% गिर गया और YTD  के  आधार पर स्टॉक 2022 में यह शेयर अब तक 4.88% गिर चुका है। स्टॉक ने (21/11/2022) को ₹388.00 के 52-वीक हाई  को छू लिया था। वहीं, (22/12/2021) को ₹110.15 का 52-वीक का लो पर पहुंच गया था। मौजूदा शेयर कीमत पर स्टॉक 1 साल के हाई  से 18.67% नीचे और 1 साल के निचले स्तर से 186.47% ऊपर कारोबार कर रहा है।

यह भी पढ़ें- सरकार बेच रही एक और कंपनी, जनवरी से शुरू होगी बिक्री की प्रक्रिया

कंपनी के बारे में 

Laboratories Ltd. एक स्मॉल-कैप कंपनी  है जो दवा उद्योग में काम करता है। फर्म की स्थापना 1989 में हुई थी और यह कई चिकित्सीय सेक्टर के लिए तैयार फॉर्मूलेशन (एफएफ) और प्री-फॉर्मुलेशन इंटरमीडिएट्स (पीएफआई) प्रदान करती है। साथ ही  कंपीन  जेनेरिक फार्मास्यूटिकल्स के विकास, प्रोडक्शन और डिस्ट्रिब्यूशन में शामिल है। 


 



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Ashneer Grover exposes bharatPe co founder shashvat nakrani after firm sues him for fraud detail here – Business News India

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फिनटेक यूनिकॉर्न BharatPe के पूर्व एमडी अश्नीर ग्रोवर ने कंपनी के को-फाउंडर शाश्वत नाकरानी को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर एक अहम खुलासा किया है। इस खुलासे को अश्नीर ग्रोवर ने शाश्वत नाकरानी का ‘दोगलापन’ करार दिया है। 

क्या है मामला: दरअसल, BharatPe ने अपने अपदस्थ को-फाउंडर अश्नीर ग्रोवर के अलावा उनकी पत्नी माधुरी जैन ग्रोवर के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दिल्ली हाईकोर्ट में दायर मुकदमे में ग्रोवर दंपत्ति और उनके तीन रिश्तेदारों पर गबन के आरोप लगाए गए हैं।

यही नहीं, BharatPe ने आर्थिक अपराध शाखा के पास आपराधिक शिकायत भी दर्ज कराई है। कंपनी ने उनसे हर्जाने के तौर पर 88.67 करोड़ रुपये की मांग की है। अब इसी मामले को लेकर अश्नीर ग्रोवर ने BharatPe के को-फाउंडर शाश्वत नाकरानी पर निशाना साधा है। 

क्या कहा अश्नीर ने: ट्विटर पर तस्वीर शेयर करते हुए अश्नीर ग्रोवर ने ‘दोगलापन’ लिखकर एक घटना का जिक्र किया है। अश्नीर लिखते हैं, ” शाश्वत (को-फाउंडर) ने मुझसे कहा- भाई डिग्री पूरी करनी है। एक साल ऑफिस बंक करके IIT पूरा कर लेता हूं। सेकेंडरी करा देना और सैलरी भी मत रोकना, इन्वेस्टर को मत बताना।” 

अश्नीर के ट्वीट के मुताबिक शाश्वत ने बोर्ड से कहा: अश्नीर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने पर मुझे कोई आपत्ति नहीं है। 

अश्नीर की नई मुसीबत: इस बीच, न्यूज एजेंसी पीटीआई के सूत्रों ने बताया है कि अशनीर ग्रोवर के पास मौजूद हिस्सेदारी और संस्थापक के दर्जे को वापस लेने के लिए मध्यस्थता अर्जी लगाई है। सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (सीआईएसी) के नियमों के तहत यह मध्यस्थता अर्जी दायर की गई है। BharatPe की यह अर्जी स्वीकार कर ली जाती है तो ग्रोवर अपने पास मौजूद कंपनी के रोके गए शेयर और संस्थापक का दर्जा गंवा सकते हैं।

कितनी है हिस्सेदारी: BharatPe में करीब 8.5 प्रतिशत हिस्सेदारी ग्रोवर के पास है लेकिन इसमें से 1.4 प्रतिशत शेयरधारिता प्रतिबंधित श्रेणी में हैं। प्रतिबंधित शेयरधारिता का मतलब है कि कंपनी के कर्मचारी के तौर पर मिली उस हिस्सेदारी को हस्तांतरित नहीं जा सकता है।

बता दें कि BharatPe ने साल की शुरुआत में ग्रोवर पर कोष की धांधली, धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे। उसके बाद ग्रोवर और उनकी पत्नी माधुरी जैन कंपनी से अलग हो गए थे। लेकिन दोनों पक्षों के बीच लगातार आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा।    



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Concor privatisation Bidding for Concor privatisation likely to begin in January 2023 – Business News India

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Concor privatisation: केंद्र सरकार कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (कॉनकॉर) के निजीकरण के लिए अगले वर्ष जनवरी में शुरुआती बोलियां आमंत्रित कर सकती है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि इसके अलावा कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय से भारतीय नौवहन निगम (SCI) की गैर-प्रमुख एवं भूमि परिसंपत्तियों को अलग करने की मंजूरी भी इस महीने मिलने की उम्मीद है जिसके बाद सरकार मार्च या अप्रैल में एससीआई के लिए वित्तीय बोलियां आमंत्रित कर सकती है।

65,000 करोड़ रुपये का विनिवेश टारगेट

मार्च में खत्म होने जा रहे चालू वित्त वर्ष में अब और कोई रणनीतिक हिस्सेदारी की बिक्री की उम्मीद नहीं है, ऐसे में 65,000 करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य को पाने के लिए सरकार छोटी हिस्सेदारी की बिक्री पर जोर दे सकती है। अधिकारी ने कहा, ”हम लक्ष्य का पीछा नहीं कर रहे। जहां भी मूल्य मिलता दिखेगा, वहां हम विनिवेश कर देंगे।” उन्होंने बताया कि बीईएमएल, एचएलएल लाइफकेयर और एससीआई की रणनीतिक बिक्री के समापन की प्रक्रिया अगले वित्त वर्ष तक जारी रह सकती है।

₹300 का यह दिग्गज शेयर टूटकर ₹2 का हुआ, 1 लाख का निवेश घटकर ₹700 रह गया, 99% का नुकसान

रुचि पत्र जनवरी तक लाने का प्रयास

सरकार एससीआई में 63.75 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री कर रही है जिसमें मैनेजमेंट का ट्रांसफर भी शामिल है। एससीआई के बहीखातों के मुताबिक जिन गैर प्रमुख परिसंपत्तियों को अलग करने के लिए रखा गया है उनका मूल्य 31 मार्च, 2022 तक 2,392 करोड़ रुपये था।

कॉनकॉर की रण्नीतिक बिक्री अगले वित्त वर्ष में पूरी होने का अनुमान है क्योंकि इस प्रक्रिया के पूरा होने में लगभग दस महीने का वक्त लगता है। अधिकारी ने बताया कि कॉनकॉर के लिए रुचि पत्र जनवरी तक लाने का प्रयास किया जाएगा।

     



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