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Jharkhand domicile policy based on 1932 Khatian is CM Hemant political bet

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आज का दिन झारखंड के लिए ऐतिहासिक है। हेमंत सरकार 1932 के खतियान पर आधारित स्थानीयता परिभाषित करने का विधेयक सदन में लाने वाली है। दरअसल, बीते जनवरी माह से ही झारखंड में स्थानीयता का मुद्दा काफी चर्चित रहा है। कई संगठनों, राजनेताओं और आम लोगों ने भी इसकी मांग को लेकर लगातार आंदोलन किया है। केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई के बीच स्थानीयता विधेयक लाने को विश्लेषक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का सबसे बड़ा राजनीतिक दांव बता रहे हैं। दिलचस्प है कि इसी साल मार्च महीने में खुद मुख्यमंत्री ने ही कहा था कि 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीयता पारिभाषित नहीं की जा सकती। 

1932 कैसे बन गया सीएम हेमंत का बड़ा सियासी दांव

आज स्थानीयता विधेयक पेश किया जा रहा है लेकिन कई लोगों के मन में सवाल होगा कि जिस खतियान आधारित स्थानीय नीति को मुख्यमंत्री ने सदन में अव्यवहारिक बताया था वो अचानक उनका सबसे बड़ा सियासी दांव कैसे बन गया? आखिर क्या बदला। कहीं केंद्रीय एजेंसियों की ताबड़तोड़ कार्रवाइयों ने सीएम हेमंत को अपनी तरकश से ये तीर निकालने को विवश तो नहीं किया। दरअसल, झारखंड में स्थानीयता का मुद्दा यहां के आदिवासियों-मूलवासियों के लिए भावनाओं से जुड़ा रहा है। शायद यही वजह भी है कि 2019 के विधानसभा चुनाव से पहले जारी अपने घोषणापत्र में झामुमो ने इसका वादा किया था। 


मार्च 2022 में मुख्यमंत्री ने इसे अव्यवहारिक बताया था

हालांकि, 23 मार्च 2022 को बजट सत्र के आखिरी दिन मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में साफ-साफ कहा था कि 1932 के खतियान पर आधारित स्थानीय नीति नहीं लाई जा सकती। उन्होंने इसे अव्यवहारिक बता दिया। कहा कि ये तो हाईकोर्ट से ही खारिज हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने तब विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा था कि विपक्ष के साथी डोमेसाइल के मुद्दे पर झारखंड में आग लगाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में 1932 के अलावा भी कई बार सर्वे सेटलमेंट हुआ है। कहीं 1975 में हुआ तो कहीं 1985 में। किसी-किसी जिले में तो 1995 में भी हुआ। हम किसे आधार मानें।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री के इस बयान पर विपक्ष ने तो निशाना साधा ही था, सत्तारूढ़ झामुमो के वरिष्ठ विधायक लोबिन हेंब्रम ने भी इसकी आलोचना की। वे घोषणापत्र का हवाला देकर अपनी ही सरकार पर हमलावर रहे। उन्होंने कई बार सार्वजनिक मंच से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर वादा-खिलाफी का आरोप लगाया। पदयात्रा की। प्रण भी लिया कि जब तक 1932 के खतियान पर आधारित स्थानीय नीति लागू नहीं होगी वे घर नहीं लौटेंगे। उनके साथ इस आंदोलन में पूर्व शिक्षा मंत्री गीताश्री उरांव भी नजर आईं। हालात ऐसे बन गए कि अगले विधानसभा चुनाव में झामुमो, लोबिन हेंब्रम को टिकट देगी इस पर ही संशय है। 

क्या केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई से बदले हालात

सवाल है कि मुख्यमंत्री ने जिस 1932 के खतियान पर आधारित स्थानीय नीति को अव्यवहारिक बताया था आज उसी पर राजी कैसे हो गए। कैसे उन्होंने इसे अपना सबसे बड़ा राजनीतिक हथियार बना लिया। इसके लिए आपको चलना होगा इसी वर्ष के अप्रैल महीने में। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने एक प्रेस कांफ्रेंस किया। आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री और खान मंत्री रहते अपने नाम से अनगड़ा में खनन पट्टा का लीज लिया। बीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से इसकी शिकायत की और मामला चुनाव आयोग तक पहुंच गया। चुनाव आयोग में सुनवाई चली। 25 अगस्त को खबर आई कि चुनाव आयोग ने राजभवन को इस मामले में अपना मंतव्य भेज दिया है और सीएम की विधायकी रद्द करने के अनुशंसा की है। 14 सितंबर को कैबिनेट की बैठक हुई और अचानक से झारखंडी जनमानस सीएम हेमंत के पीछे लामबंद हो गया। दरअसल, इस बैठक में सरकार ने 1932 के खतियान पर आधारित स्थानीय नीति को पारिभाषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। पूरा झारखंड झूमने लगा।

हालांकि, विरोध के स्वर भी उठे। पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने कहा कि यदि 1932 को स्थानीयता का आधार बनाया गया तो कोल्हान की पूरी आबादी इससे बाहर हो जाएगी क्योंकि वहां आखिरी सर्वे सेटलमेंट 1932 के बाद हुआ। उनकी पत्नी और कांग्रेस सांसद गीता कोड़ा ने भी इसका विरोध किया। कांग्रेस के ही कई अन्य नेताओं ने खुलकर विरोध नहीं किया पर चुप्पी साध ली। यहां बीजेपी भी बैकफुट पर आ गई। बीजेपी के लिए असमंजस ये है कि यदि वो समर्थन करती है तो एक बड़ी आबादी जो बाहर से आई है और बीते कई वर्षों से यहां रह रही है, वो वर्ग नाराज हो जाएगा। यदि विरोध करती है तो आदिवासियों की नाराजगी झेलनी पड़ेगी। हालांकि, बाबूलाल मरांडी और रघुवर दास सरीखे शीर्ष नेताओं ने कानूनी नजरिए से इसका विश्लेषण किया। फिर भी कई लोगों को लगता था कि ये प्रस्ताव तक ही सीमित रह जाएगा। हेमंत सरकार इसे विधेयक के रूप में नहीं ला पाएगी। 

1932 सीएम हेमंत को दिला पाएगा बीजेपी पर सियासी बढ़त?

1 नवंबर 2022 को ईडी ने मनी लाउंड्रिंग और अवैध खनन मामले में पूछताछ के लिए मुख्यमंत्री को समन किया। 3 नवंबर को पूछताछ के लिए बुलाया। इससे पहले 2 नवंबर की शाम तक मुख्यमंत्री सचिवालय की तरफ से एक पत्र आया। बताया गया कि 11 नवंबर को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है। सरकार इसमें 1932 के खतियान पर आधारित स्थानीयता कानून लाने वाला विधेयक पेश करेगी। बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी ने इसे सीएम द्वारा सहानुभूति हासिल करने का हथकंडा बताया लेकिन जनता खुश है। कहना गलत नहीं होगा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कानूनी चक्रव्यूह से निकलने के लिए सियासी बाण चलाया है। ये कितना कारगर होता है ये तो वक्त बताएगा।

1932 दरअसल, इस समय हेमंत सरकार के लिए दोनों हाथों में लड्डू जैसा है। विधानसभा से पारित कराने के बाद इसे केंद्र के पास भेजा जाना है। यदि वहां से मंजूरी मिली तो झामुमो का चुनावी वादा पूरा हो जाएगा। सीएम हेमंत की सियासी जीत होगी वहीं यदि केंद्र इसे नामंजूर करता है तो झामुमो आगामी चुनावों में कहेगी कि हमने तो पूरा प्रयास किया लेकिन केंद्र सरकार ने रोक दिया। वहां भी सियासी बढ़त है। 

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Punjab CM Bhagwant Mann Home Minister Amit Shah Presidential assent for bills on sacrilege

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शुक्रवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने बेअदबी के अपराधियों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान करने वाले दो महत्वपूर्ण राज्य विधेयकों के लिए राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त करने में केंद्र के हस्तक्षेप की मांग की। 2018 में, जब बरगाड़ी बेअदबी की घटना राज्य की राजनीति पर हावी थी, तब तत्कालीन अमरिंदर सिंह सरकार ने बेअदबी से संबंधित दो बिल पारित किए थे। हालांकि, दोनों बिल राष्ट्रपति की सहमति पाने में विफल रहे।

शाह से मुलाकात के दौरान मान ने कहा कि पवित्र पुस्तकों की बेअदबी राज्य के लिए एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि यह देखा गया है कि इस तरह के अपराधों के लिए भारतीय दंड संहिता की मौजूदा धाराओं 295 और 295-ए के तहत दी जाने वाली सजा पर्याप्त नहीं है। मान ने शाह को बताया कि पंजाब विधानसभा ने ‘भारतीय दंड संहिता (पंजाब संशोधन) विधेयक, 2018’ और ‘दंड प्रक्रिया संहिता (पंजाब संशोधन) विधेयक 2018’ पारित किया है जिनमें लोगों की भावनाओं को आहत करने के इरादे से श्री गुरु ग्रंथ साहिब, भगवत गीता, कुरान और बाइबिल को अपमानित करने या बेअदबी करने के मामले में आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है।

उन्होंने कहा कि यह संशोधन संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के अनुरूप है। राज्य सरकार की ओर से जारी एक बयान में मान के हवाले से कहा गया कि ये विधेयक अक्टूबर 2018 से राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए लंबित हैं। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती राज्य होने की वजह से पंजाब में सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने की बहुत आवश्यकता है। उन्होंने विधेयकों को राष्ट्रपति की शीघ्र स्वीकृति दिलाने के लिए केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की।

मुख्यमंत्री ने एक और अहम मुद्दा उठाते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक ‘जीरो लाइन’ के 150 मीटर के बाद निर्माण किया जा सकता है, लेकिन पंजाब में कुछ जगहों पर सीमा सुरक्षा बाड़ ‘जीरो लाइन’ से काफी दूरी पर हैं। केंद्र की ओर से कुछ महीने पहले सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को अधिक शक्तियां प्रदान करने के बाद से ही यह मुद्दा राज्य और केंद्र के बीच विवाद का मुद्दा बना हुआ है।

मान ने कहा कि खेती की जमीन का एक बड़ा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय सीमा और मौजूदा बाड़ के बीच स्थित है, इसलिए कई किसानों को अपनी जमीन पर खेती करने के लिए सीमा बाड़ पार करनी पड़ती है और उन्हें इस वजह से रोजाना बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे सीमा सुरक्षा बल का कार्य भी बढ़ जाता है और सरकार को किसानों को पर्याप्त मुआवजा देना पड़ता है।

बयान में कहा गया है कि मान ने केंद्रीय गृह मंत्री से राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किए बिना किसानों के व्यापक हित में जहां भी संभव हो, सीमा बाड़ को अंतरराष्ट्रीय सीमा की ओर स्थानांतरित करने की संभावना तलाशने का आग्रह किया। उन्होंने शाह से राज्य पुलिस बल का आधुनिकीकरण सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त धन मुहैया कराने का भी आग्रह किया ताकि वह नई चुनौतियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सके। मान ने कहा कि सीमा पार से घुसपैठ और ड्रोन हमलों को रोकने के लिए राज्य पुलिस बल को आधुनिक उपकरण और हथियार मुहैया कराना समय की जरूरत है।

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सऊदी अरब में जिनपिंग का स्वागत देख जल जाएगा अमेरिका, प्रिंस ने आसमान से लेकर जमीन तक बिछाई 'रेड कार्पेट'

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जमीन से लेकर आसमान तक जिनपिंग को सलामी दी गई। जो देश कभी अमेरिका के इशारे पर चलता था वो आज उसके दुश्मन नंबर एक चीन के स्वागत में आसमान से लेकर जमीन तक रेड कार्पेट बिछा रहा है।

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BJP से दूर रहें कार्यकर्ता, बंगाल में पंचायत चुनाव से पहले CPI-M का सख्त आदेश

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बंगाल में कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) ने अपने कार्यकर्ताओं के लिए सख्त आदेश जारी किया। इसके तहत कार्यकर्ताओं को भारतीय जनता पार्टी से दूरी बनाकर रखने के लिए कहा गया है।

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