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manpuri loksabha upchunav dimple yadav akhilesh yadav parivarvad pm narendra modi bjp – India Hindi News

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समाजवादी पार्टी ने मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव में डिंपल यादव को उतारा है, जो मुलायम सिंह यादव की विरासत पर दावा ठोक रही हैं। मुलायम के निधन से खाली सीट को लेकर कई नामों पर विचार चल रहा था और परिवार से भी धर्मेंद्र यादव और तेज प्रताप यादव की भी चर्चा थी। लेकिन अंत में मुहर डिंपल यादव के ही नाम पर लग गई। माना जा रहा है कि डिंपल को मैदान में उतारकर अखिलेश यादव ने नेताजी की विरासत को चाचा शिवपाल से ना बांटने की कोशिश की है। इसके अलावा परिवार और पार्टी पर भी उन्होंने पकड़ बनाने की कोशिश की है। 

शिवपाल से मिलने पहुंचे अखिलेश, कैसे जीतेंगी डिंपल? बन रहा प्लान

मैनपुरी लोकसभा सीट पर एक तिहाई आबादी यादवों की है, ऐसे में उन्हें जीत का अनुमान है। लेकिन एक अहम सवाल भी है, जो आने वाले दिनों में समाजवादी पार्टी को परेशान कर सकता है। दरअसल डिंपल यादव भले ही मैनपुरी से जीत हासिल कर लें, लेकिन परिवारवाद का आरोप एक बार फिर से सपा पर चस्पा हो जाएगा। पहले ही भाजपा समाजवादी पार्टी में सैफई परिवार के दबदबे का जिक्र कर निशाना साधती रही है। अखिलेश यादव ने इन आरोपों से ही बचने का संकेत देते हुए पहले डिंपल यादव को चुनाव न लड़ाने की बात कही थी, लेकिन अब फिर पुराने ढर्रे पर ही दिख रहे हैं।

2014 में जीते सपा के 5 सांसद परिवार के ही थे 

सपा के 5 सांसद 2014 के आम चुनाव में चुने गए थे। मैनपुरी, आजमगढ़, कन्नौज जैसी सीटों से जिन नेताओं को चुना गया था, उनमें से सभी मुलायम सिंह यादव के ही कुनबे से थे। इसे लेकर भाजपा खूब तंज कसती थी। पीएम नरेंद्र मोदी ने खुद प्रचार में कई बार इसे मुद्दा बनाया था। ऐसे में अब अखिलेश यादव का यह फैसला फिर से सपा के खिलाफ भाजपा के ही प्रचार को मजबूती देने वाला होगा। खासतौर पर ऐसे वक्त में सपा ने यह फैसला लिया है, जब कांग्रेस जैसी पार्टी ने भी गांधी परिवार की छाया से बाहर निकलने की कोशिश की है और खड़गे को कमान दी है।

AAP जैसे दलों को क्यों मिल रही है सफलता, नहीं समझी सपा?

आम आदमी पार्टी जैसे नए दल परिवारवाद के खिलाफ भी अभियान छेड़े हुए हैं। एक तरह से यह नई राजनीति का दौर है और समाजवादी पार्टी यदि परिवार के सदस्यों पर ही भरोसा जता रही है तो यह अवधारणा की जंग में पिछड़ने वाला है। एक अहम बात यह भी है कि यादव परिवार के बड़े नेता जब खुद चुनाव में उतरते हैं तो वह अपनी सीट बचाने के लिए भी जद्दोजहद करते हैं। ऐसे में वह दूसरे इलाकों पर फोकस नहीं कर पाते और पार्टी के चुनावी अभियान पर असर पड़ता है। यही कुछ वजहें हैं, जिनके चलते डिंपल यादव को मैनपुरी से उतारना अखिलेश की दूरदर्शिता नहीं दिखाता।

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Shadow of Ukraine war as Modi Putin not to hold annual in-person summit this year – India Hindi News

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस साल वार्षिक व्यक्तिगत शिखर सम्मेलन के दौरान नहीं मिलेंगे। नाम न बताने की शर्त पर समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग के एक सूत्र ने कहा कि भारत और रूस के बीच संबंध मजबूत बने हुए हैं, लेकिन इस समय दोस्ती का ढोल पीटना प्रधानमंत्री मोदी के लिए फायदेमंद नहीं हो सकता है। बता दें कि मोदी और पुतिन के व्यक्तिगत तौर पर ना मिलने की ये खबर ऐसे समय में आई है जब रूसी राष्ट्रपति ने यूक्रेन पर परमाणु हमला करने की धमकी दी है। 

इस बीच, समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने भारत सरकार के एक सूत्र के हवाले से कहा कि परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की पुतिन की धमकियों से बहुत पहले ही शिखर सम्मेलन न करने का फैसला ले लिया गया था। पुतिन पिछले साल दिसंबर में 21वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए दिल्ली आए थे। इसके अलावा, दोनों नेता फोन के जरिए यूक्रेन व द्विपक्षीय संबंधों को लेकर फोन पर बातचीत करते रहे हैं। बता दें कि पिछले 22 साल में ये दूसरा मौका होगा जब दोनों देशों के नेता आमने-सामने नहीं मिलेंगे। आमतौर पर दिसंबर में आयोजित होने वाले शिखर सम्मेलन को महामारी के कारण 2020 में सिर्फ एक बार रद्द कर दिया गया था। 

साल 2000 से भारत के प्रधानमंत्री और रूस के राष्ट्रपति हर साल वार्षिक शिखर सम्मेलन में व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करते हैं। इसी साल सितंबर में, दोनों नेताओं ने उज्बेकिस्तान में एक क्षेत्रीय सुरक्षा ब्लॉक शिखर सम्मेलन (SCO summit) के मौके पर मुलाकात की थी। उस मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने पुतिन से कहा था कि यह ‘युद्ध का युग नहीं’ है। फरवरी में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत चीन के बाद रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया है।

 

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More than 8000 Indians imprisoned in foreign jails maximum in Gulf countries like UAE Saudi – India Hindi News

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विदेशी जेलों में कैद भारतीयों को लेकर केंद्र सरकार ने शुक्रवार को एक चौंकाने वाल आंकड़ा दिया है। भारत सरकार ने बताया कि विदेशी जेलों में 8000 से अधिक भारतीय कैद हैं। केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री (MoS) वी मुरलीधरन ने शुक्रवार को कहा कि वर्तमान में 8,000 से अधिक भारतीय विदेशी जेलों में कैद हैं और इनमें से 4,389 केवल खाड़ी देशों में बंद हैं। MoS मुरलीधरन ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में कहा, “मंत्रालय के पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्तमान में विदेशी जेलों में विचाराधीन कैदियों सहित भारतीय कैदियों की संख्या 8441 है। इनमें से 4,389 खाड़ी देशों (संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर, कुवैत, बहरीन, ओमान आदि) की जेलों में बंद हैं।” 

केंद्रीय मंत्री से पूछा गया कि क्या संयुक्त अरब अमीरात की जेलों में बंद कैदी अपनी बाकी सजा भारतीय जेलों में काट सकते हैं? इस पर मंत्री ने कहा कि सजा पाने वाले व्यक्तियों के हस्तांतरण (TSP) समझौते के तहत, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की जेलों में बंद भारतीय नागरिकों को अपनी शेष सजा काटने के लिए भारत में स्थानांतरित किया जा सकता है और भारत में बंद UAE के नागरिकों को UAE स्थानांतरित किया जा सकता है। बता दें कि भारत और यूएई के बीच सजायाफ्ता व्यक्तियों के स्थानांतरण (TSP) समझौते पर 23 नवंबर, 2011 को हस्ताक्षर किए गए थे। 

केंद्रीय मंत्री ने कहा, “टीएसपी समझौते के तहत एक सजायाफ्ता व्यक्ति का उसके अपने देश में स्थानांतरण विभिन्न औपचारिकताओं के पूरा होने पर निर्भर करता है जैसे कि कैदी की स्थानांतरित होने की इच्छा, स्थानांतरित करने और प्राप्त करने वाले देश की सहमति, अनुरोध को संसाधित करने के लिए आवश्यक पूर्ण दस्तावेज की उपलब्धता, उपयुक्त एजेंसियों से से मंजूरी आदि। सजायाफ्ता व्यक्तियों के हस्तांतरण की प्रक्रिया के लिए आवश्यक दस्तावेजों के अनुरोध को यूएई की ओर भेज दिया गया है।” 

दोहा में हिरासत में लिए गए आठ पूर्व नौसैनिक अधिकारियों का मामला फिर सुर्खियों में आया है। 1 दिसंबर को, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि कतर में गिरफ्तार किए गए भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारियों के मामले में भारत नियमित रूप से प्रतिक्रिया दे रहा है और दूतावास सक्रिय रूप से इस मुद्दे पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि हिरासत में लिए गए भारतीय भारत में परिवार के सदस्यों के संपर्क में हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “हम नियमित रूप से इसका जवाब दे रहे हैं। हमारा दूतावास सक्रिय रूप से मामले को आगे बढ़ा रहा है। हम समझते हैं कि हिरासत में लिए गए भारतीय अब भारत में अपने परिवारों से टेलीफोन पर बात करने में सक्षम हैं, उनमें से कुछ के परिवार दोहा में रहते हैं।” 

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बेथ मूनी और ताहिला मैकग्रा की शतकीय साझेदारी भारत पर पड़ी भारी, पहले टी20 में ऑस्ट्रेलिया ने हरमनप्रीत की टीम को 9 विकेट से हराया

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ऑस्ट्रेलिया महिला क्रिकेट टीम ने पहले टी20 में भारत को 9 विकेट से हरा दिया है। पांच मैचों की टी20 सीरीज के पहले मैच में बेथ मूनी ने नाबाद 89 रन बनाए। भारत के लिए देविका ने एकमात्र विकेट लिया।

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