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Mohammad Rizwan dismissal talk of the day in T20 World Cup 2022 Semi Final know what is the law

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सिडनी में बुधवार 9 नवंबर को पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच टी20 वर्ल्ड कप 2022 का पहला सेमीफाइनल मैच खेला गया। इस मैच में एक अजीब वाकया देखने को मिला जब पाकिस्तान के ओपनर मोहम्मद रिजवान एक हाईट वाली गेंद पर कैच आउट हो गए, लेकिन फील्डर्स ने उन्हें रन आउट भी कर दिया था, क्योंकि उनको लगा था कि गेंद हाई के कारण नो बॉल हो सकती है, लेकिन क्या फील्ड अंपायर और थर्ड अंपायर के नो बॉल दिए जाने पर रिजवान रन आउट होते? इसका जवाब क्रिकेट के नियम बनाने वाली संस्था मेरिलबोन क्रिकेट क्लब यानी एमसीसी ने दी है। 

दरअसल, ट्रेंट बोल्ट न्यूजीलैंड की तरफ से 17वां ओवर फेंकने के लिए आए। इसी ओवर की आखिरी गेंद पर मोहम्मद रिजवान ने कदमों का इस्तेमाल किया तो बोल्ट ने थोड़ी सी गेंद आगे रखने की कोशिश की, लेकिन गेंद फुलटॉस हो गई। रिजवान क्रीज से काफी आगे थे तो मैदानी अंपायर ने इस गेंद को नो बॉल नहीं दिया। इस गेंद पर रिजवान कैच आउट हो गए। कीवी फील्डर्स को लगा कि गेंद नो बॉल हो सकती है तो इससे बचने के लिए उन्होंने रिजवान को रन आउट कर दिया। 

इसी पर एमसीसी ने नियमों के बारे में बताया कि इस मामले में क्या सही है और क्या गलत। मेरिलबोन क्रिकेट क्लब के मुताबिक, अगर थर्ड अंपायर गेंद को नो बॉल करार देता तो रिजवान रन आउट नहीं होते, क्योंकि गेंद कैच के समय पर ही डेड हो गई थी। डेड होने के बाद गेंद को फिर से प्ले में नहीं लाया जा सकता, लेकिन अगर फील्ड अंपायर उस गेंद को नो बॉल देते तो कैच के टाइम पर गेंद डेड बॉल नहीं होती और उस स्थिति में रिजवान को रन आउट दिया जाता। 

India vs England T20 World Cup 2022 Semi final live

हालांकि, थर्ड अंपायर ने गेंद को चेक किया तो पाया कि गेंद वेस्ट हाईट से ऊपर जरूर है, लेकिन रिजवान क्रीज से आगे थे। ऐसे में वे कैच आउट हो गए। एमसीसी ने इस पर नियम 20.6 का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है, “एक बार गेंद डेड हो जाने के बाद, किसी भी निर्णय पर पहुंचने के लिए गेंद उस डिलीवरी के लिए वापस प्ले में नहीं आ सकती है।” यदि मैदानी अंपायरों ने उस समय नो बॉल करार दिया होता तो गेंद डेड नहीं होती और रन आउट हो सकता था। हालांकि, यह तीसरे अंपायर के फैसलों पर लागू नहीं हो सकता है। इस घटना में, यह नो बॉल नहीं थी, इसलिए रिजवान कैच आउट हो गए।

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Gujarat Murder accused caught after 50 years AADHAR data became the reason

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गुजरात के अहमदनगर से एक शख्स गिरफ्तार हुआ। मंगलवार को सामने आया इस मामले का जिक्र खास इसलिए है, क्योंकि आरोपी वारदात के करीब 50 सालों के बाद पुलिस के हत्थे चढ़ा है। खबर है कि पुलिस को Aadhar डेटाबेस के जरिए यह सफलता मिली है। मामले को विस्तार से समझते हैं।

क्या था मामला

73 साल के सीताराम भटाने ने 23 साल की उम्र में 70 वर्षीय महिला मणिबेन शुक्ला की 11 सितंबर 1973 को हत्या कर दी थी। आरोपी महिला के ही सैजपुर स्थित सोसाइटी के मकान में अपने दो भाइयों के साथ रहता था। आरोप है कि भटाने चोरी के इरादे से महिला के घर में घुसा था, लेकिन वह अचानक जाग गईं और उसे देखकर चीख पड़ी।

हत्या के तीन दिनों के बाद पड़ोसियों को बदबू के चलते शक हुआ। स्थानीय लोगों ने पुलिस को बुलाया और घर खोलकर शुक्ला का शव बरामद किया। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गवाहों का कहना था कि आखिरी बार भटाने को ही शुक्ला के घर में जाते हुए देखा गया था। साथ ही उसे घर में ताला लगाते भी देखा गया। पुलिस ने आरोपी की तलाश की, लेकिन वह शहर छोड़कर भाग गया और पुलिस उसे पकड़ नहीं सकी।

आरोपी की तलाश में पुलिस ने अहमदनगर, महाराष्ट्र दल भेजे, लेकिन वह नहीं मिला और मामले ठंडे बस्ते मं चला गया। केस को दोबारा 14 अगस्त 2013 को खोला गया था।

अब जब सरदार नगर पुलिस स्टेशन पर नए इंस्पेक्टर पीवी गोहिल ने काम संभाला, तो उनकी नजर इस मामले पर गई। एक अखबार से बातचीत में उन्होंने कहा, ’30 नवंबर के आसपास, मेरी आंखें 1973 के एक मामले पर अटक गई। मैंने अपनी टीम से यह देखने के लिए कहा कि शख्स के पास अहमदनगर में जारी आधार कार्ड है या नहीं।’

उन्होंने बताया कि टीम ने आधार कार्ड की जानकारी निकाली और पाया कि भटाने अहमदनगर जिले पथरड़ी तालुका के रंजनी गांव में रह रहा है। सरदारनगर पुलिस की टीम वहां पहुंची और भटाने से पूछताछ की, जिसने 50 साल पहले शुक्ला की हत्या की बात कबूली।

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How BJP changed political Scenario in Gujarat within Five Years amid anti Incumbency Narendra Modi Amit Shah magic factor – एंटी इनकमबेंसी के बावजूद 5 साल में BJP ने कैसे बदली गुजरात की सियासी तस्वीर? जानें

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गुजरात विधान सभा चुनाव परिणाम के ताजा रुझानों और नतीजों से स्पष्ट हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) लगातार सातवीं बार राज्य की सत्ता पर काबिज होने जा रही है। इससे बड़ी बात यह कि पांच साल के अंदर बीजेपी ने राज्य का राजनीतिक परिदृश्य बदल दिया है। 2017 के चुनावों में 99 सीटों पर सिमटी बीजेपी इस बार दो तिहाई सीटों के साथ 151 सीटों पर जीत दर्ज करती दिख रही है, जो राज्य के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी जीत है।

ऐसे में यह बात गौर करने वाली है कि आखिर बीजेपी ने पिछले पांच सालों में ऐसे कौन से कदम उठाए, जिससे राज्य की राजनीतिक सूरत बदल गई और बीजेपी अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करती नजर आ रही है। आइए जानते हैं ऐसे पांच बड़े कारण जिसने बीजेपी के खिलाफ एंटीइनकमबेंसी फैक्टर होने के बावजूद बंपर बहुमत दिलाने में बड़ा रोल निभाया है।

वाइब्रेंट गुजरात और मोदी का करिश्मा: 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात चुनावों के केंद्र में रहे हैं। वह न सिर्फ गुजराती अस्मिता के प्रतीक चिह्न बने हुए हैं, बल्कि बीजेपी के लिए अभी भी सबसे बड़े जिताऊ फैक्टर बने हुए हैं। इस चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य में कुल 27 चुनावी रैलियां की हैं। उन्होंने दो दिन लगातार अहमदाबाद में 16 विधानसभा सीटों को कवर करते हुए 40 किलोमीटर का लंबा रोड शो किया है।

केजरीवाल का दो दिन में डबल धमाका, गुजरात-हिमाचल हारकर भी AAP ने बनाया नया रिकॉर्ड

गुजरात को वाइब्रेंट बनाने की कोशिशों में पीएम मोदी ने अपने गृह राज्य में खूब निवेश करवाया। वो पिछले पांच सालों में अक्सर किसी न किसी योजना के उद्घाटन या शिलान्यास के मौके पर गुजरात जाते रहे हैं। गुजरात में पिछले पांच सालों के दौरान बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश हुआ है। आधारभूत संरचनाओं के विकास में गुजरात ने कई मील के पत्थर गाड़े हैं। उन्हीं में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ भी शामिल है। केवड़िया में सरदार सरोवर डैम पर स्थापित ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ की ऊंचाई 182 मीटर है, जो अमेरिका के न्यूयॉर्क के 93 मीटर ऊंची ‘स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी’ से दोगुनी है। इस स्मारक ने शुरुआत के डेढ़ साल में ही पर्यटकों से करीब 120 करोड़ रुपये की कमाई की थी। अभी हाल ही में चुनावों से ऐन पहले 1.54 लाख करोड़ का फॉक्सकॉन-वेदांत प्रोजेक्ट महाराष्ट्र से गुजरात शिफ्ट हुआ था, जिस पर काफी हो हल्ला मचा था।

मुख्यमंत्री समेत बदली पूरी कैबिनेट:

राज्य में एंटी इनकमबेंसी फैक्टर को देखते हुए पिछले साल सितंबर 2021 में मोदी-शाह की जोड़ी ने मुख्यमंत्री विजय रुपाणी समेत उनके मंत्रिमंडल के सभी मंत्रियों को कैबिनेट से हटा दिया और उनकी जगह नया सीएम और नए मंत्रियों ने शपथ ली। बीजेपी ने ये फेरबदल कर गुजरात में दरकती सियासी जमीन को न सिर्फ रोकने में सफलता पाई बल्कि देशभर में यह संदेश देने में कारगर रही कि बीजेपी विकास और जनसरोकार से समझौता नहीं कर सकती है। इस कवायद की वजह से पिछले एक साल में जनमानस में बीजेपी के प्रति रुख में बदलाव आया है।

दिग्गजों का टिकट काटा:

बीजेपी ने इस विधानसभा चुनाव में 40 फीसदी विधायकों के टिकट काट दिए थे। इसके साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी और पूर्व उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल समेत कई मंत्रियों और दिग्गजों का भी टिकट काट दिया गया । बीजेपी ने इसके जरिए न सिर्फ एंटी इनकमबेंसी फैक्टर को दबाने की कोशिश की बल्कि नए लोगों और युवाओं को टिकट देकर पार्टी ने आमजन के बीच पैठ बनाने की भरपूर कोशिश की, जो सीटों में तब्दील होती नजर आ रही है।

पाटीदारों को साथ किया:

1990 के बाद परंपरागत रूप से पाटीदार बीजेपी के साथ ही रहे हैं लेकिन 2015 में आरक्षण की मांग पर पाटीदार समुदाय ने बीजेपी के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंक दिया था। पाटीदारों का एक बड़ा तबका तब 2017 में कांग्रेस के पक्ष में चला गया था, इससे बीजेपी को खासा नुकसान उठाना पड़ा था। इस बार बीजेपी ने पाटीदार आंदोलन के बड़े नेता हार्दिक पटेल को न सिर्फ अपने पाले में किया बल्कि उसे वीरमगाम विधानसभा सीट से मैदान में उतार भी दिया।

1931 की अंतिम जाति जनगणना के मुताबिक राज्य में पाटीदारों की आबादी करीब 11 फीसदी मानी जाती है। माना जाता है कि करीब 40 विधानसभा सीटों पर पाटीदार हार-जीत तय करते हैं। 1980 के दशक तक पाटीदार समाज कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक माना जाता था। आम आदमी पार्टी ने भी पाटीदारों को लुभाने की बहुत कोशिश की लेकिन बीजेपी ही उसमें सफल होती दिख रही है। इसके अलावा बीजेपी ने ठाकोर समुदाय के अल्पेश ठाकोर को भी अपने पाले में कर लिया।

बागियों पर कंट्रोल:

हिमाचल प्रदेश की तरह गुजरात में भी बीजेपी के बागी खेल करने की जुगत में थे लेकिन बीजेपी आलाकमान ने यहां बागियों पर समय रहते नकेल कस लिया, इससे बीजेपी राज्य में बेहतर प्रदर्शन कर पाई है। बीजेपी को गुजरात में 12 बागियों का खतरा सता रहा था। पार्टी ने उन सभी नेताओं को सस्पेंड कर कड़ा संदेश दिया।

बागियों में वडोदरा जिले की वाघोडिया सीट से मौजूदा विधायक मधु श्रीवास्तव के अलावा पाडरा के पूर्व विधायक दीनू पटेल और बायड के पूर्व विधायक धवलसिंह जाला भी शामिल थे। इनके अलावा बीजेपी ने कुलदीपसिंह राउल (सावली), खाटूभाई पागी (शेहरा), एस एम खांट (लूनावाडा), जे पी पटेल (लूनावाड़ा), रमेश जाला (उमरेठ), अमरशी जाला (खंभात), रामसिंह ठाकोर (खेरालू), मावजी देसाई (धनेरा) और लेबजी ठाकोर (डीसा निर्वाचन क्षेत्र) को भी निलंबित कर दिया था।

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Why did Rohit Sharma July 2019 tweet go viral after India vs Bangladesh 2nd ODI IND vs BAN Rohit Sharma Injury update

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टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा का जुलाई 2019 का एक ट्वीट खूब वायरल हो रहा है। रोहित ने बांग्लादेश के खिलाफ दूसरे वनडे इंटरनेशनल मैच में डिसलोकेटेड अंगूठे के साथ बल्लेबाजी की। रोहित फील्डिंग के दौरान चोटिल हो गए थे, जिसके बाद वह फील्डिंग करने नहीं आ पाए। रोहित को स्लिप में कैच लेने के चक्कर में चोट आई थी। जिसके बाद उनके हाथ से खून भी निकलने लगा था। रोहित ने मैच के बाद बताया कि उनके हाथ में कुछ टांके भी आ रखे हैं और अंगूठा डिसलोकेट हो गया है। रोहित भारत की ओर से नंबर-9 पर बल्लेबाजी करने आए थे। रोहित की इस बहादुरी भरी पारी के बाद उनका जुलाई 2019 में किया ट्वीट खूब वायरल हो रहा है।

रोहित को टूटे अंगूठे के साथ बल्लेबाजी करता देख इमोशनल हुईं उनकी पत्नी

रोहित ने तक ट्वीट किया था, ‘मैं सिर्फ अपनी टीम के लिए नहीं मैदान पर उतरता हूं, मैं अपने देश के लिए मैदान पर आता हूं।’ रोहित के इस ट्वीट का स्क्रीनशॉट अब सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा है।

रोहित शर्मा की जुझारू पारी के बाद वायरल हुआ SKY का ये ट्वीट

टीम इंडिया को बांग्लादेश के खिलाफ लगातार दूसरी हार झेलनी पड़ी है। पिछला मैच भारत ने एक विकेट से गंवाया था और अब पांच रन से मैच हार गया। रोहित शर्मा ने 28 गेंदों पर 51 रन बनाए, रोहित के बल्ले से तीन चौके और पांच छक्के लगाए। रोहित ने लगभग टीम इंडिया को जीत के दरवाजे तक पहुंचा दिया था, लेकिन मुस्तफिजुर रहमान की आखरी यॉर्कर गेंद पर वह छक्का नहीं लगा पाए और मैच भारत ने पांच रनों से गंवा दिया।

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