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तेलंगाना में 2023 में विधानसभा चुनाव होने हैं। वहीं, 2024 में पूरा देश सरकार चुनेगा। अब दिल्ली और तेलंगाना तक पहुंचने की कवायद में भारतीय जनता पार्टी और तेलंगाना राष्ट्र समिति (अब भारत राष्ट्र समिति) के बीच तकरार जारी है। इस मुकाबले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मैदान संभालते नजर आ रहे हैं। वहीं, मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की पार्टी भी विपक्ष पर हमला बोलने का कोई मौका नहीं छोड़ रही।

ताजा घटना मुनुगोडे की

राज्य में सत्ता की राह बनाने की कोशिश कर रही भाजपा का अब मानना है कि वह टीआरएस का विकल्प बनकर उभरी है। हालांकि, पार्टी को हाल ही में संपन्न हुए मुनुगोडे उपचुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। वहीं, कांग्रेस का गढ़ कही जाने वाले सीट पर सीएम केसीआर ने नियंत्रण हासिल कर लिया है।

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क्यों हारकर भी जीती भाजपा

सबसे महंगा उपचुनाव करार दिया गया मुनुगोडे में कई समीकरण सामने आए, जो भाजपा के पक्ष में जाते दिखे। पहला, पार्टी ने कांग्रेस के विधायक रहे के राजगोपाल रेड्डी को शामिल कर पहले से ही कमजोर कांग्रेस को और कमजोर कर दिया। दूसरा, उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार पी श्रावंती को तीसरे स्थान पर धकेलकर पर खुद को विपक्ष के तौर पर दिखा दिया।

प्रचार के जरिए भी भाजपा ने साबित तक दिया था कि टीआरएस के लिए राह आसान नहीं होगी। केसीआर समेत कैबिनेट के कई बड़े नाम मुनुगोडे के मैदान में मेहनत करते नजर आए।

भाजपा पर विधायक खरीदने के आरोप

मुनुगोडे उपचुनाव से पहले BJP पर विधायकों को खरीदने के आरोप लगे थे। 3 नवंबर को मतदान पूरा होने के बाद ही सीएम केसीआर ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई थी, जिसमें अपने विधायकों के दावों को साबित करने के लिए फुटेज सार्वजनिक की थी। उन्होंने आरोप लगाए थे कि भाजपा टीआरएस के 20-30 विधायकों को 100-100 करोड़ रुपये में खरीदने की कोशिश कर रही है।

PM मोदी की ‘नो एंट्री’

पीएम मोदी शुक्रवार से 4 दक्षिण भारतीय राज्यों के दौरे पर हैं। इनमें तेलंगाना के रामगुंडम का नाम भी शामिल है। अब उनके दौरे से पहले ही टीआरएस समेत कई संगठन एक्टिव हो गए हैं। तेलंगाना चेनेथा यूथ फोर्स ने पंजगुट्टा और जुबली हिल्स समेत शहर के कई हिस्सों में ‘मोदी नो एंट्री’ के पोस्टर लगा दिए हैं। हाल ही में टीआरएस ने हैंडलूम्स पर 5 फीसदी जीएसटी लगाने का विरोध किया था।

मंत्री एलाबेली दयाकर राव ने कहा, ‘हम तेलंगाना में पीएम के दौरे का विरोध नहीं कर रहे हैं। लेकिन हम पीएम से पूछ रहे हैं कि बीते 8 सालों में राज्य के लिए क्या किया। केंद्र ने आंध्र प्रदेश रिऑर्गेनाइजेशन एक्ट 2014 में किए गए वादों को भी पूरा नहीं किया है।’

भाजपा देखे तेलंगाना का रास्ता, KCR दिल्ली निहारे

भाजपा लंबे समय से दक्षिण भारतीय राज्यों में एंट्री की कोशिशों में है। इस लिहाज से पार्टी तेलंगाना में काफी सक्रिय नजर आ रही है। जुलाई में ही पार्टी ने 2023 विधानसभा चुनाव के लिए ‘पल्ले गोशा-भाजपा भरोसा’ कार्यक्रम की शुरुआत का फैसला किया है।

पार्टी के प्रदेश प्रभारी तरुण चुघ ने कहा था, ‘भाजपा तेलंगाना विधानसभा चुनाव 2023 के लिए पूरी तरह तैयार है और इसके लिए बूथ स्तर पर मजबूती का काम जारी है। आने वाले दिनों में 30 केंद्रीय मंत्री भी तेलंगाना आएंगे।’ उन्होंने कहा, ‘तेलंगाना के लोगों ने केसीआर सरकार को बाहर करने का मन बना लिया है और यही कारण है कि तेलंगाना के लाखों लोग पीएम नरेंद्र मोदी की संकल्प यात्रा में शामिल हुए थे।’

इसके अलावा पार्टी ने 1 जुलाई को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक भी हैदराबाद में की थी। उस बैठक में पीएम मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह समेत भाजपा के कई दिग्गज शामिल हुए थे।

इधर, केसीआर भी राष्ट्रीय राजनीति की ओर देख रहे हैं। साल 2001 में तेलंगाना को राज्य का दर्जा दिलाने के मकसद से तैयार टीआरएस को उन्होंने दशहरे के मौके पर भारत राष्ट्र समिति में बदल दिया है। उनके इस कदम को भाजपा के साथ टीआरएस के तल्ख होते रिश्तों से भी जोड़कर देखा गया जब भाजपा ने तेलंगाना में विस्तार की कोशिशें तेज की।

इसके अलावा वह केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ विपक्षी मोर्चा तैयार करने की मुहिम में नजर आए। इसके लिए उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, बिहार के सीएम नीतीश कुमार समेत कई नेताओं से मुलाकात की। दिसंबर 2021 में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से मिलने से शुरू हुआ सिलसिला 3 सितंबर तक जारी रहा। इस दौरान मुलाकात करने वालों में वाम नेता, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा, झारखंड सीएम हेमंत सोरेन समेत कई बड़े नेता शामिल रहे।

पीएम मोदी का तेलंगाना कार्यक्रम

PMO के अनुसार, प्रधानमंत्री रामागुंडम में 9500 करोड़ रुपये से अधिक की कई परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। वे रामागुंडम में उर्वरक संयंत्र राष्ट्र को समर्पित करेंगे। रामागुंडम परियोजना की आधारशिला भी 7 अगस्त 2016 को प्रधानमंत्री ने ही रखी थी। इसके अलावा पीएम भद्राचलम रोड-सत्तुपल्ली रेल लाइन राष्ट्र को समर्पित करेंगे जिसे लगभग 1000 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। इसके साथ ही वे 2200 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न सड़क परियोजनाओं का शिलान्यास भी करेंगे।

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heart attack prevention tips how to know you have clots in blood arteries

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मेडिकल रिकॉर्ड्स कहते हैं, भारत में अचानक होने वाली मौतों की सबसे बड़ी दिल की बीमारी है। डॉक्टर्स कहते हैं कि जिन लोगों को हार्ट अटैक होता है, उनके ब्लड में पहले से क्लॉट होते हैं। उन्हें पता नहीं चल पाता। जब कभी एक्सरसाइज या ओवरएक्साइटमेंट में एग्जर्शन होता है तो ये क्लॉट टूटकर ब्लड में आगे बढ़ते हैं। अगर ये आगे चलकर ब्रेन, लंग या हार्ट की ब्लड सप्लाई रोक देते हैं तो हार्ट अटैक हो जाता है। ब्लड क्लॉट होना सामान्य प्रक्रिया है। खून के थक्के इसलिए जमते हैं कि कभी आपको चोट लगे या ऐक्सीडेंट वगैरह हो तो ज्यादा खून बह जाने से मौत न हो जाए। ये खून को जमाकर बहने से रोकते हैं। हालांकि ये क्लॉट्स अगर खुद नहीं घुलते तो आपके लिए खतरा बन सकते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कोरोना के बाद लोगों में यह समस्या देखने को मिल रही है। इस वजह से भी हार्ट अटैक की घटनाएं बढ़ रही हैं। यहां कुछ लक्षण हैं जिनसे आप पहचान सकते हैं कि कहीं आपकी धमनियों में खून का थक्का तो नहीं जम रहा।

बढ़े हैं ब्लड क्लॉटिंग के मामले

कुछ स्टडीज में सामने आया है कि कोरोना के बाद लोगों में ब्लड क्लॉट्स के मामले बढ़े हैं। इस वजह से हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक्स जैसे केसेज सामने आ रहे हैं। जब आर्टरीज यानी धमनी में थक्का जमता है तो इसे आर्ट्रियल थ्रॉम्बोसिस कहते हैं। यह काफी खतरनाक होता है। वेलनेस एक्सपर्ट करिश्मा शाह ने अपने इंस्टाग्राम पर कुछ लक्षण बताए हैं जिनसे आप क्लॉटिंग के लिए सतर्क हो सकते हैं। 

सूजन

जब क्लॉट रक्त संचार को रोकता या धीमा करता है तो यह वेसेल्स में जमा होता है, जिससे सूजन हो सकती है। आपके पेट या बांह में भी क्लॉट हो सकता है। क्लॉट हट भी जाता है तो भी कई लोगों को सूजन या दर्द की समस्या रहती है। यह ब्लड वेसेल्स के डैमेज की वजह से होता है। 

त्वचा का रंग

अगर क्लॉट आपके पैर या बांह में है तो नीला या लाल रंग दिखाई देगा। ब्लड वेसेल्स के डैमेज से आपकी स्किन का रंग बदला दिखेगा। 

दर्द

अचानक से सीने में दर्द होने का मतलब यह भी हो सकता है कि क्लॉट टूटा है। या फिर कई बार यह साइलेंट हार्ट अटैक का  लक्षण भी हो सकता है। अगर दर्द आपकी बांई भुजा में है तो आपको डॉक्टर से जरूर मिल लेना चाहिए। ये भी पढ़ें: हार्ट अटैक से मौतों के बीच हर डॉक्टर ने दी एक ही सलाह, आप भी करें फॉलो

सांस लेने में परेशानी

सांस लेने में दिक्कत होना सीरियस दिक्कत है। यह आपके लंग या हार्ट में क्लॉट का साइन हो सकता है। आपके दिल की धड़कन तेज हो सकती है या आपको पसीने के साथ बेहोशी आ सकती है। 

ब्लड क्लॉट की वजहें

प्रेग्नेंसी

देर तक बैठना या बेड रेस्

स्मोकिंग

मोटापा

हार्ट एरिदिमिया

डीप वेन थ्रॉम्बॉसिस

कोविड 

परिवार में ब्लड क्लॉट की हिस्ट्री

ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स या हॉरमोन थेरपी ड्रग्स

नोट: इन सारे लक्षणों की वजह कोई और समस्या भी हो सकती है। आपको जरा भी शक हो तो सबसे पहले अपने डॉक्टर से मिलें।

 

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Himachal Pradesh elections results 2022 arvind kejriwal AAP one percent vote share

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Himachal Pradesh Elections Results 2022: हिमाचल प्रदेश के चुनाव 68 सीटों के रुझान में आम आदमी पार्टी का खाता तक नहीं खुल पाया है। प्रदेश में सामने आए रुझानों की मानें तो पहाड़ी राज्य में आम आदमी पार्टी फिसलती हुई नजर आ रही है। हिमाचल में पहाड़ों पर चढ़ाई के मकसद से चुनावी मैदान में उतरी अरविंद केजरीवाल की पार्टी आप एक कदम भी नहीं चलती दिख रही है। चुनाव आयोग के आंकड़ों में आम आदमी पार्टी का स्कोर जीरो है।

इतना ही नहीं, चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक पार्टी को 1 फीसदी ही वोट मिले हैं। ऐसे में दिल्ली नगर निगम चुनावों में अपना जादू दिखाने वाले अरविंद केजरीवाल की पार्टी प्रदेश में पार्टी बुरी तरह से मात खाती दिख रही है। 

फिलहाल के रूझानों में कांग्रेस 38 और भाजपा 27 चल रही है। तीन सीटों पर निर्दलीय समेत अन्य आगे चल रहे हैं। ऐसे में रूझानों पर गौर करें तो राज्य में भाजपा का रिवाज बदलने का नहीं बल्कि कांग्रेस का राज बदलने का नारा साकार होता दिखाई दे रहा है। सभी सीटों पर चुनाव लड़ने वाली आम आदमी पार्टी(आप) को मतदाताओं ने पूर्णतया नकार दिया है।      

    

हिमाचल प्रदेश की कुल 68 सदस्यीय विधानसभा के लिए 12 नवंबर को चुनाव हुए, जिसमें 412 उम्मीदवार चुनावी अखाड़े में उतरे। चुनावी दंगल में भाजपा और कांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी (आप), मार्क्सवादी कम्युनस्टि पार्टी (माकपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और अनेक निर्दलीय उतरे थे। इनमें 388 पुरुष और 24 महिला उम्मीदवार हैं।

    

इस बार के विधानसभा चुनाव में 76.6 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान केंद्रों पर अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर इतिहास रच दिया था। नर्विाचन आयोग ने हालांकि राज्य में इस बार 80 प्रतिशत मतदान का लक्ष्य रखा था। इससे पहले वर्ष 2017 में 75.57 प्रतिशत, 2007 में 71.61 प्रतिशत और 2012 में 72.69 प्रतिशत मतदान हुआ था। वर्ष 2017 के चुनावों में भाजपा को 44, कांग्रेस को 21 सीटें मिलीं थीं। दो सीटों पर नर्दिलीय और एक सीट पर माकपा प्रत्याशी ने जीत हासिल की थी।

 

 

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किसने दौड़ा दी 'मोदी के घर' में सपा की साइकिल, अखिलेश के लिए गुजरात से भी खुशखबरी

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उत्तर प्रदेश में दो विधानसभा और एक लोकसभा सीट पर शानदार प्रदर्शन करने वाली समाजवादी पार्टी को गुजरात से भी खुशखबरी मिली है। पहली बार पीएम मोदी के गृहराज्य में सपा का खाता खुलने की संभावना दिख रही है।

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