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Varanasi Gyanvapi Case Court order What is Places of Worship Act jis daleel ko kharij kar diya gya

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ज्ञानवापी मामले पर गुरुवार को एक बार फिर मुस्लिम पक्ष को झटका लगा है। हिंदू पक्ष की ओर से ज्ञानवापी हिंदुओं को सौंपने, मुस्लिमों का प्रवेश रोकने और सर्वे में मिले कथित शिवलिंग की पूजा का अधिकार मांगने वाली याचिका को अदालत ने सुनने योग्य माना और अगली सुनवाई के लिए दो दिसंबर की तारीख तय कर दी है। मुस्लिम पक्ष ने प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 को आधार बनाते हुए 7 रूल 11 (7/11) के प्रार्थना पत्र अदालत में दाखिल किया था। कहा था कि यह वाद प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट के तहत सुनने योग्य ही नहीं है। अदालत ने मुस्लिम पक्ष की दलील खारिज कर दी और याचिका को सुनने योग्य माना है।

इससे पहले श्रृंगार गौरी मामले में दायर वाद में भी वाराणसी के जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में मुस्लिम पक्ष ने प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 को आधार बनाया था। कहा था कि ऐसे मुकदमे कोर्ट में दायर नहीं किए जा सकते हैं। जिला जज ने उस मामले में भी मुस्लिम पक्ष की दलील को खारिज कर दिया था। आइए जानें 7 रूल 11 और प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 क्या है?

7 रूल 11 क्या है

आम भाषा में अगर ऑर्डर 7 रूल नंबर 11 को समझा जाए तो इसके तहत कोर्ट किसी केस में तथ्यों की मेरिट पर विचार करने के बजाए सबसे पहले ये तय करता है कि क्या याचिका सुनवाई करने लायक है या नहीं। जो राहत की मांग याचिकाकर्ता की ओर से मांगी जा रही है, क्या उसे कोर्ट द्वारा दिया भी जा सकता है या नहीं। अगर कोर्ट को ये लगता है कि याचिका में मांगी गई राहत दी ही नहीं जा सकती तो कोर्ट केस की मेरिट पर जाने के बजाए बिना ट्रायल के ही याचिककर्ता को सुनने से इनकार कर सकता है।

रूल 7 के तहत कई वजह है, जिनके आधार पर कोर्ट शुरुआत में ही याचिका को खारिज कर देता है। मसलन अगर याचिकाकर्ता ने वाद को दाखिल करने की वजह स्पष्ट नहीं की हो या फिर उसने दावे का उचित मूल्यांकन न किया हो या उसके मुताबिक कोर्ट फीस न चुकाई गई हो। इसके अलावा जो एक महत्वपूर्ण आधार है वो है कि कोई कानून उस मुकदमे को दायर करने से रोकता हो।

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क्या कहता है प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991

1991 में लागू किया गया प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट कहता है कि 15 अगस्त 1947 से पहले अस्तित्व में आए किसी भी धर्म के पूजा स्थल को किसी दूसरे धर्म के पूजा स्थल में नहीं बदला जा सकता। यदि कोई इस एक्ट का उल्लंघन करने का प्रयास करता है तो उसे जुर्माना और तीन साल तक की जेल भी हो सकती है। यह कानून तत्कालीन पीवी नरसिंह राव सरकार 1991 में लेकर आई थी। यह कानून तब आया जब बाबरी मस्जिद और अयोध्या का मुद्दा बेहद गर्म था।

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मस्जिद कमेटी का पक्ष

सुप्रीम कोर्ट में मस्जिद कमेटी के वकील का कहना था कि हिंदू पक्षकारो की ओर से सिविल कोर्ट में दायर मुकदमें को सुना ही नहीं जाना चाहिए, क्योंकि 1991 का प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट ऐसे मुकदमो का दाखिल करने से रोकता है। इस कानून के मुताबिक देश में किसी धार्मिक स्थल का स्वरूप वही रहेगा जो 15 अगस्त 1947 को था। इसे बदला नहीं जा सकता।

मस्जिद कमेटी का कहना है कि जब ऑर्डर 7 रूल 11 का हवाला देकर कोर्ट का रुख किया गया तो कोर्ट को सबसे पहले उसे सुनना चाहिए था, लेकिन इसके बजाए कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे और बाद में शिवलिंग के दावे वाली जगह को सील करने का आदेश दे दिया, ये गलत है। इसके बाद मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि वो मस्जिद कमेटी की याचिका अपने पास पेंडिंग रखेंगे। साथ ही जिजा जज को निर्देश दिया था कि वो सबसे पहले मस्जिद कमेटी की सिविल प्रोसीजर कोड के ऑर्डर 7 रूल नंबर 11 के तहत दायर याचिका पर सुनवाई करेंगे।

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दशकों तक कांग्रेस का ही राज, फिर कैसे BJP ने बदला 'रिवाज', रिजल्ट से पहले 'हिमाचल की कहानी'

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हिमाचल प्रदेश के लगभग 70 वर्षों के राजनीतिक इतिहास में कांग्रेस का ही वर्चस्व रहा है यानी इस पार्टी ने राज्य में सर्वाधिक समय तक शासन किया है लेकिन भाजपा के राजनीतिक उदय के बाद यह परिपाटी टूटी।

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Gujarat Exit Poll 2022 Congress Jairam Ramesh Reaction – India Hindi News – गुजरात में बीजेपी की जीत वाले Exit Poll को कांग्रेस ने किया खारिज, जयराम बोले

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Gujarat Exit Poll 2022: गुजरात, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली नगर निगम में हुए मतदान के बाद एग्जिट पोल सामने आ गए हैं। गुजरात में बीजेपी की बड़ी जीत का अनुमान है, जबकि दिल्ली नगर निगम में आम आदमी पार्टी और हिमाचल प्रदेश में बीजेपी व कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर होती हुई दिखाई दे रही है। कांग्रेस ने एग्जिट पोल्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है कि यह ऐसा समय है, जब एग्जिट पोल्स को एग्जिट हो जाना चाहिए। जयराम रमेश मंगलवार को भारत जोड़ो यात्रा के दौरान कन्हैया कुमार के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे, जिस दौरान उन्होंने एग्जिट पोल पर अपनी प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने कहा, ‘यह एग्जिट पोल के एग्जिट होने का समय है। एग्जिट पोल पर आधारित सवाल अनुचित हैं। हम जानते हैं कि ये पोल कौन करवाता है, किसके प्रभाव में और क्यों कराए जाते हैं। मैं इन एग्जिट पोल पर विश्वास नहीं करता।” सभी एग्जिट पोल्स ने गुजरात में बीजेपी के लगातार सातवीं बार सरकार बनाने का अनुमान जताया है। पार्टी को 117-151 सीटें मिल सकती हैं। वहीं, कांग्रेस के लिए 16-51 सीटों का अनुमान है। आम आदमी पार्टी भी 2 से 13 सीटों तक जीतने में कामयाब रह सकती है।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व फायरब्रांड छात्र नेता कन्हैया कुमार ने भी एग्जिट पोल को खारिज करते हुए कहा, “मैंने यह दावा नहीं किया है कि बीजेपी गुजरात में बहुमत से नहीं जीतेगी, और न ही मैंने कहा है कि कांग्रेस सत्ता में वापसी करेगी। हमने देखा है कि हमारे लोकतांत्रिक संस्थानों को अक्षम किया जा रहा है और गुजरात के लोगों की चिंताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।”

राजस्थान में कांग्रेस के नेताओं के बीच पड़ी दरार के बारे में बात करते हुए, कुमार ने मजाकिया टिप्पणी करते हुए कहा, ”देखिए, जब आप एक राजनीतिक दल में होते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे कई बर्तन एक साथ व्यवस्थित किए जाते हैं। कुछ बर्तनों का आपस में टकराना तय है जो आपके घर में भी होता है।” नवंबर में, पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस नेता सचिन पायलट के बीच अनबन की खबरों को खारिज कर दिया था। 

पूर्व जेएनयू छात्र नेता ने भी बिलकिस बानो मामले को उठाया और कहा, ”वे चुनाव जीत रहे हैं लेकिन फिर क्या बिलकिस बानो के बलात्कारियों को गुणी पुरुष कहना सही है? क्या यह सही है? उन्हें जाकर अपनी बेटियों से पूछना चाहिए कि क्या बलात्कारी को गुणवान कहना सही है। चुनावों के बावजूद सही और गलत के बीच अंतर करना महत्वपूर्ण है।” ‘भारत जोड़ो यात्रा’ आठ राज्यों को कवर करते हुए 90 दिनों के लिए पूरे भारत में यात्रा कर रही है। वर्तमान में राजस्थान के कोटा में यात्रा को जम्मू और कश्मीर के अपने अंतिम गंतव्य तक लगभग 1000 किमी की दूरी तय करनी है।

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हिंदुओं, मुसलमानों की तरह ईसाइयों को भी त्योहार मनाने का मौका मिले, संसद के शीतकालीन सत्र पर बोले अधीर रंजन चौधरी

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चौधरी ने कहा, ‘‘देश में आज मुद्दे ही मुद्दे हैं और विपक्ष सदन में चर्चा और सिर्फ चर्चा करना चाहता है। ऐसे में चर्चा के लिये पर्याप्त समय देकर सरकार को सदन में कामकाज का माहौल तैयार करना चाहिए।’’

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